मल में खून आना: बवासीर (Piles) या कैंसर का संकेत? जानिए कब तुरंत डॉक्टर से मिलें

This health guide is researched and prepared by Dr. Akhilesh's clinical medical team and reviewed by Dr. Akhilesh Yadav. It is for general educational purposes only and does not constitute expert clinical advice. Always consult a physician for individual diagnostics.
मल में खून आने को हल्के में न लें। जानिए बवासीर (Piles) या फिशर और बड़ी आंत के कैंसर या कोलाइटिस में क्या अंतर होता है, और कब कोलोनोस्कोपी आवश्यक है।
मल त्याग के दौरान या बाद में खून आना (Blood in Stool) एक ऐसा लक्षण है जिसे लोग अक्सर शर्म के कारण छिपाते हैं या खुद ही यह मान लेते हैं कि उन्हें 'बवासीर' (Piles) है। वे बिना किसी डॉक्टर से जांच कराए तरह-तरह की क्रीम, चूर्ण या घरेलू नुस्खे अपनाने लगते हैं। यह उपेक्षा जानलेवा हो सकती है। हालांकि अधिकांश मामलों में खून आने का कारण बवासीर या फिशर होता है, लेकिन कभी-कभी यह बड़ी आंत के अल्सर, कोलाइटिस या मलाशय के कैंसर (Colorectal Cancer) का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है।
🆚 बवासीर (Piles) बनाम आंत का कैंसर: लक्षणों में अंतर
बवासीर और गंभीर बीमारियों के खून आने के पैटर्न में कुछ स्पष्ट अंतर होते हैं:
- बवासीर / फिशर (Piles/Fissures): इसमें आमतौर पर मल त्याग के बाद चमकीला लाल (Bright Red) खून बूंद-बूंद करके टपकता है। फिशर में मल के साथ तेज दर्द और जलन होती है, जबकि बवासीर (Internal Piles) में अक्सर दर्द नहीं होता।
- आंत का कैंसर / कोलाइटिस (IBD/Cancer): इसमें खून का रंग गहरा लाल या काला हो सकता है और यह मल के साथ अच्छी तरह मिला हुआ होता है। इसके साथ ही बार-बार पेट खराब होना, दस्त होना, पेट में मरोड़ उठना, और बिना प्रयास के तेजी से वजन कम होना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।
🚨 रेड फ्लैग लक्षण (Red Flag Warnings)
यदि मल में खून आने के साथ निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण हो, तो बिना एक दिन की देरी किए तुरंत पेट रोग विशेषज्ञ (Gastroenterologist) से मिलना चाहिए: 1) उम्र 45 वर्ष से अधिक होना, 2) मोशन की आदतों में अचानक बदलाव (जैसे कभी दस्त तो कभी कब्ज रहना), 3) भूख कम लगना और अत्यधिक कमजोरी महसूस होना, 4) मल का बहुत पतला (pencil-thin stool) आना।
🔍 जांच की सही विधि: कोलोनोस्कोपी
मल में खून आने के सही कारण का पता लगाने का एकमात्र और सबसे सटीक तरीका कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) जांच है। इसमें एक छोटी दूरबीन के जरिए डॉक्टर बड़ी आंत के अंदरूनी हिस्से को लाइव देखते हैं। यदि वहां कोई सूजन, छाला या गांठ (Polyp/Tumour) दिखाई देती है, तो उसका तुरंत टुकड़ा (Biopsy sample) ले लिया जाता है। शुरुआती स्टेज में बड़ी आंत के पॉलिप्स को एंडोस्कोपी के जरिए (Polypectomy) निकालकर कैंसर बनने से रोका जा सकता है।
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